पचपेड़ी/मस्तूरी। बिलासपुर जिले के पचपेड़ी क्षेत्र में जलसों–भरारी–टांगर–बोहरडीह मार्ग की बदहाल सड़क लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क की जर्जर हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ महीने पहले इसी मार्ग पर हुए दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की जान जा चुकी है और अब एक बार फिर इसी सड़क पर हादसा हुआ है।

22 मार्च 2026 की दोपहर ग्राम जलसों में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया था। शिवकुमार लहरें के तीनों बेटे—देवेंद्र लहरें (26 वर्ष), बीरेंद्र (24 वर्ष) और बजरंग (24 वर्ष)—अपनी ECO कार क्रमांक CG 04 LJ 4810 से चाचा के घर जा रहे थे। इसी दौरान सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक के साथ सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश भी देखने को मिला था।
ग्रामीणों के मुताबिक, हादसे के बाद भी करीब 25 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की हालत में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क और बारिश के बाद बदहाल रास्ते के कारण इस मार्ग पर वाहन चलाना लगातार जोखिम भरा बना हुआ है।

इसी बीच 31 अगस्त 2026 की सुबह करीब 7 बजे एक और हादसा हो गया। जलसों निवासी एवं नवभारत संवाददाता मुकेश कुमार कांत अपने गृहग्राम जलसों से पचपेड़ी की ओर जा रहे थे। सुकुलकारी बीज मार्ग के पास खराब सड़क के कारण वे दुर्घटनाग्रस्त होकर बेहोश हो गए। हादसे में उनके हाथ में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है।
मुकेश कुमार कांत ने सड़क की बदहाली पर सीधा आरोप लगाया कि वर्षों से सड़क खराब होने के कारण इस मार्ग पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क मरम्मत के नाम पर कई बार खानापूर्ति की गई। गड्ढों में मिट्टी-मुरुम डालकर किए गए कार्य बारिश के पानी में बह गए और सड़क फिर से बदहाल हो गई। ग्रामीणों ने पूर्व में हुए मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग की जांच की मांग भी उठाई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
22 मार्च की मौत और 31 अगस्त के हादसे ने एक बार फिर इस जर्जर सड़क की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े




