खूंटाघाट डेम से पानी छोड़े जाने के सरकारी दावों की पोल अब गांवों की सूखी धरती खोल रही है। लगभग 20 दिन पहले प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा नहरों में पानी छोड़े जाने की बात कही गई थी, लेकिन नीचे छोर के गांवों तक आज भी पानी नहीं पहुंच पाया है। हालत यह है कि जिन तालाबों को भरने और भूजल स्तर बढ़ाने का दावा किया गया था, वे अब भी सूखे पड़े हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पानी केवल औपचारिकता निभाने और फोटो खिंचवाने के लिए छोड़ा गया। नहरों में पानी का बहाव इतना कम रहा कि अंतिम छोर तक पहुंचने से पहले ही पानी गायब हो गया। बेल्हा, भुरकुंडा, गोडाडीह, लोहारसी, फोदीपाली, मकुंदपुर और बसंदपुर जैसे गांव आज भी पानी की भारी समस्या से जूझ रहे हैं।

गांव के लोगों का कहना है कि तालाबों में पानी नहीं पहुंचने से अब हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं। कई हैंडपंपों से पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दूर तक पानी लाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो आने वाले दिनों में खेती पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। पशुओं के लिए भी पानी का संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल कागजों और कैमरों में पानी छोड़ने से गांवों की प्यास नहीं बुझने वाली।
लोगों ने मांग की है कि नहरों की सही मॉनिटरिंग कर लगातार पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए, ताकि आखिरी छोर के गांवों तक भी राहत पहुंच सके।

