मस्तूरी। गर्मी के बढ़ते असर और गांवों में गहराते जल संकट के बीच जिला प्रशासन ने मस्तूरी क्षेत्र के लिए बड़ी राहत भरा फैसला लिया है। कलेक्टर के निर्देश पर शनिवार 25 अप्रैल को सुबह 11 बजे खूंटाघाट जलाशय से खारंग जलाशय की बाएं और दाएं तट की नहरों में पानी छोड़ा गया, जिससे क्षेत्र के 107 गांवों के 211 निस्तारी तालाब भरे जाएंगे। इस पहल से ग्रामीण अंचलों में पानी की किल्लत से जूझ रहे हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

जल संसाधन विभाग द्वारा शुरू की गई इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य नहर किनारे बसे गांवों के तालाबों को भरकर पेयजल और निस्तारी की समस्या को कम करना है। लगातार बढ़ती गर्मी और जल स्तर में गिरावट के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही थी। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की मांग और ग्रामीणों की जरूरत को देखते हुए प्रशासन ने यह त्वरित निर्णय लिया।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नहर से छोड़े गए पानी का उपयोग केवल निस्तारी तालाबों को भरने के लिए ही किया जाए। जल संसाधन विभाग के मैदानी अमले को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तालाब भरवाना सुनिश्चित करें और पानी का उपयोग किसी अन्य कार्य में न होने दें। विभागीय अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है ताकि योजना का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे।

खूंटाघाट जलाशय में पानी छोड़े जाने से पहले जनप्रतिनिधियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर जल प्रवाह की शुरुआत की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, सदस्य दामोदर कांत, सतकली बावरे, अंबिका साहू, कोटा जनपद अध्यक्ष सूरज साधेलाल, मस्तूरी के पूर्व जनपद सदस्य लक्ष्मी टंडन, कांग्रेस नेता अमृत राठौर, रमेश पटेल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग के एसडीओ विजय श्रीवास्तव, सब इंजीनियर राकेश सोनी एवं मस्तूरी क्षेत्र के पत्रकार संघ अध्यक्ष रघु यादव, सत्यजीत बावरे सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
प्रशासन की इस पहल को मस्तूरी क्षेत्र के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। यदि योजना तय समय पर प्रभावी ढंग से पूरी हुई, तो आने वाले दिनों में मस्तूरी के ग्रामीण अंचलों में जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है। गर्मी के इस कठिन दौर में खूंटाघाट से छोड़ा गया पानी गांवों के लिए राहत, उम्मीद और जीवन का नया संचार बनकर पहुंचने वाला है।

